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चंदेलप्रतिहार के सामंत थे। चंदेल वंश का संस्थापक नंनुक (831-845 ई०) थे। उनकी राजधानी मोहबा या कलिंजर थी जिसे बदल कर खजुराहो किया गया। सत्ता का केंद्र बुंदेलखंड था। बुंदेलखंड का प्राचीन नाम जोजकभुक्ति था।
चंदेल वंश के शासकों की सूची :
नंनुक – 831-845 CE
वाक्पति – 845-865 CE
जयशक्ति और विजयशक्ति – 865-885 CE
राहिल – 885-905 CE
श्री हर्ष – 905-925 CE
यशोवर्मन – 925-950 CE
धंग देव – 50-999 CE
गंद देव – 999-1002 CE
विद्याधर – 1003-1035 CE
विजयपाल – 1035-1050 CE
देव वर्मन 1050-1060 CE
कीर्ति वर्मन – 1060-1100 CE
सल्लक्षण वर्मन – 1100-1110 CE
जय वर्मन – 1110-1120 CE
पृथ्वी वर्मन – 1120-1128 CE
मदन वर्मन – 1128-1165 CE
यशो वर्मन II – 1164-65 CE
परमर्दिदेव – 1165-1203
यशोवर्मन (925-950 ई०)
चंदेल वंश का प्रथम स्वतंत्र वह सबसे प्रतापी शासक यशोवर्मन हुए। इन्होंने कन्नौज पर आक्रमण किया प्रतिहार राजा देवपाल को हराया उससे एक विष्णु की प्रतिमा बलपूर्वक ली और खजुराहो में विष्णु मंदिर में स्थापित करवा दिया और महोबा के स्थान पर खजुराहो को राजधानी बनाया।
धंग देव (950-999 ई०)
यशोवर्मन के पश्चात धंग देव शासक बना। धंग देव खजुराहो में अनेकों मंदिर बनवाया इसने विश्व प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर, जिन्ननाथ मंदिर,कंदरिया महादेव का मंदिर का निर्माण करवाया। कंदरिया महादेव का मंदिर का निर्माण 999 ई० में करवाया गया। खजुराहो के विश्व विख्यात मंदिर का निर्माण राजा धंग ने ही करवाया था। यह मंदिर स्थापत्य कला का उत्कृष्ट प्रतिमान है। धंग देव ने शिव की आराधना करते हुए गंगा-यमुना के संगम पर अपना प्राण त्याग दिया।
विद्याधर (1003-1035 ई०)
धंग देव के बाद उसका पुत्र विद्याधर शासक बना। इसके समय कन्नौज पर महमूद ग़ज़नवी का आक्रमण हुआ कन्नौज के प्रतिहार शासक राज्यपाल ने बिना लड़े ही आत्मसमर्पण कर दिया जिससे विद्याधर नाराज होकर कन्नौज पर आक्रमण कर राज्यपाल का वध कर दिया और त्रिलोचन पाल को शासक शासक बनाया। इसके बाद महमूद गजनवी से युद्ध किया। युद्ध अनिर्णायक रहा। विद्याधर एकमात्र भारतीय राजा था जिसने महमूद गजनी की महत्वकांक्षाओं का सफलतापूर्वक डटकर सामना किया। विद्याधर के शासनकाल में महमूद गजनबी ने दो बार आक्रमण किया था जिसका उसने डटकर मुकाबला किया फलस्वरुप विद्याधर और महमूद गजनबी में शांति समझौता कायम हो गया। विद्याधर ने परमार शासक राजा भोज को भी परास्त किया। विद्याधर के बाद चंदेल वंश का पतन प्रारंभ हुआ।
कीर्तिवर्मन (1060-1100)
कीर्तिवर्मन को चंदेल वंश का पुनर्स्थापक माना जाता है उन्होंने महोबा में कृति सागर नामक तालाब बनवाया। कृति वर्मन के दरबार के विद्वान कृष्ण मिश्र ने प्रबोध चंद्रोदय की रचना की थी।
परमर्दिदेव (1165-1203)
चंदेल वंश के अंतिम शासक परमर्दिदेव या परमार या परमल थे। उनके दरबार में आल्हा खंड के दो प्रसिद्ध योद्धा आल्हा एवं उदल इनके सेनानायक थे। पृथ्वीराज चौहान से युद्ध करते हुए आल्हा और उदल मारा गया। पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर अधिकार कर लिया। परमर्दिदेव के समय कुतुबुद्दीन ऐबक का खजुराहो पर आक्रमण हुआ और परमर्दिदेव ने अधीनता स्वीकार कर ली तो उसके मंत्री अजयदेव ने परमर्दिदेव की हत्या कर दी और इसी के साथ चंदेल वंश का अंत हो गया।